अमितजी के ब्लॉग से

जग मुझे टेढ़ी नज़र से देखता है
और, लो, पाषाण मुझपर फेंकता है
जो उसे पत्थर वही तो फूल मेरे
प्यार की तो भूल भी अनुकूल मेरे

श्री हरिवंश राय बच्चन

ये पंक्तियाँ मैंने “तीन पत्ती” नमक चलचित्र को देखने के बाद पढ़ी| बच्चन जी का तो मैं हमेशा से ही प्रशंसक रहा हूँ| यह चलचित्र प्रख्यात  भले ही न हुई हो, पर फिर भी मुझे बहुत पसंद आई|

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About Pranab Narayan Jha

I am an eternal student, wanting to learn something from everyone. Currently living in Houston, USA. The purpose of this blog is to write about things I find interesting and also, through it, read what other people write and think. Some of my interests are football (soccer), my work which involves fluid flow, learning about India and its ancient history.
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2 Responses to अमितजी के ब्लॉग से

  1. Rohitashwa says:

    झा जी,

    मैं भी हरिवन्श राय श्रीवास्तव (“बच्चन”) जी का प्रशन्सक हूं | ऊनके सुपुत्र मुझे उतना नहीं सुहाते हैं |

    आपका मित्र रोहिताश्व

    • PNJ says:

      रोहित,
      अमिताभ बच्चन हमारे फिल जगत के सबसे बड़े कलाकार रहे हैं ऐसा मैं मानता हूँ| कुछ खामियाँ तो सभी में होती हैं| पिता-पुत्र की यह जोड़ी अपने अपने कर्म क्षेत्र में अव्वल हैं, इसमें कोई संदेह नहीं होना चाहिए|

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